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कबीर दास दोहे भजन 2.o

Kabir Das
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सुख के सब साथी,...।
साधू भूखा भाव का ,धन का भूखा नाही ।
मन निर्मल भया, जैसे गंगा नीर।
मन निर्मल करो, निर्मल हरि के नाम।
ना घर तजना भला, ना तजना घर आय।
जो हरि के रंगीन रहते,...।
जाति न पूछो साधू की,...।
घट घट राम है दुनिया देखे ना ही।
गरब ना कीजिए...।
कबीर मन पंछी भया, उड़ि उड़ि जाए।
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